Dainik Bhaskar (Hindi)

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स्कूलों को लाइसेंस राज से मुक्त करना होगा

स्कूलों को लाइसेंस राज से मुक्त करना होगा

स्कूल खोलने के लिए अब भी 30 से 45 अनुमतियों की जरूरत होती है, स्वायत्तता से ही आएगी गुणवत्ता

गुस्से के युग में अपनी जीवनशैली को श्रेष्ठ न मानें

संदर्भ... देश के हर वर्ग में बढ़ता रोष व असंतोष और रोजगार बढ़ाने पर पूरा ध्या न केंद्रित करने की जरूरत

कम सरकार, अधिकतम शासन का पहला सबूत

ठंड का यह मौसम हमारे लिए अब तक असंतोष भरा ही रहा है। हम पूरे पश्चिमोत्तर को घेर लाने वाले विषैले स्मॉग, घटती आर्थिक वृद्धि, नौकरियां जाने और जटिल जीएसटी से निपटने में लगे हैं। लेकिन, आखिरकार एक अच्छी खबर आई है। बिज़नेस करने की आसानी के मामले में भारत विश्व बैंक की वैश्विक रैंकिंग में 30 स्था न ऊंचा उठा है। सारे दस मानकों पर सुधार हुआ है। कोई अन्य देश ऐसा नहीं कर सका है। इस रिपोर्ट को आईडीएफसी/नीति आयोग के 3,200 से ज्यादा कंपनियों के एंटरप्राइज सर्वे पर आधारित अध्ययन के साथ पढ़ने से इस भरोसे का ठोस आधार मिलता है कि आखिरकार जमीन पर सांस्थानिक सुधार शुरू हो गए हैं। यह मोदी के

काम ही खुशी है, जॉब देने का वादा पूरा करें

काम ही खुशी है, जॉब देने का वादा पूरा करें

मेरे सारे परिचि तों ने पि छले माह डोकलाम में भारत-चीन गति रोध खत्म होने पर गहरी राहत महसूस की थी। हफ्तों तक हवा में युद्ध के बादल मंडराते रहे, जबकि भारत-चीन को अपने इति हास के इस निर्णा यक मौके पर युद्ध बिल्कु ल नहीं चाहि ए। हम में से कई लोग भूटान के प्रति गहरी कृतज्ञता महसूस कर रहे हैं कि वह भारत के साथ खड़ ा रहा और हम अन्य पड़ोसि यों से भी ऐसे ही रिश्तों की शिद् दत से कामना करते हैं। हाल के वर्षों में भारत को बि जली बेचकर भूटान समृद्ध हुआ है।

निजी स्कूलों की फीस से छेड़छाड़ न करें

संदर्भ... फीस कंट्रोल की बजाय सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाएं और शिक्षा में निवेश को बढ़ावा दें

नियति से मिलने का एक और ऐतिहासिक क्षण

नियति से मिल ने का एक और ऐतिहासि क क्षण

सभी महिलाओं को गरिमा और समानता दें

संदर्भ... तीन तलाक से आगे जाकर भारतीय समाज में नारी के खि लाफ घरेलू हिंसा खत्म होना ज्या दा जरूरी

स्टीव बेनन : व्हाइट हाउस में धर्म योद्धा


संदर्भ... गीता की अपनी सैन्यवादी व्याख्या से प्रेरित होकर मध्य-पूर्व में युद्ध छेड़ सकते हैं ट्रम्प के मुख्य रणनीतिकार

क्यों अपराधी जीत जाते हैं, उदारवादी नहीं?

जब भी चुनाव आते हैं तो मैं यह सोचकर हताश हो जाता हूं कि हम सच्चे, स्वतंत्र और सुधार चाहने वाले उदार नागरिकों की बजाय फिर अपराधियों, लुभावने नारों वाले भ्रष्टों और राजनीति क वंश के सदस्यों को चुन लेंगे। इस बार तमिलनाडु में शशिकला और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की धक्कादायक जीत साफ-सुथरे उदारवादियों की नाकामी को रेखांकित करती है।

नोटबंदी को बचाकर ऐसे निकालें कालाधन

नोटबंदी के तीन हफ्ते बाद आम आदमी की जिंदगी में तकलीफ, आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती और कई क्षेत्रों में नौकरियां जाने की खबरें दिखने लगी हैं। अगली दो तिमाही में अर्थव्यवस्था दो प्रतिशत अंक से सिकुड़ जाएगी- राष्ट्रीय संपदा का यह बहुत बड़ा नुकसान है। लेकिन अब पीछे हटने की कोई गुंजाइश नहीं है। आइए, देखें कि नरेंद्र मोदी नोटबंदी को बचाकर कैसे कालेधन वाले भ्रष्टाचार के स्रोत खत्म कर सकते हैं।